In gehri baaton ko aaj tum pe chodti hun..
kuch waqt ke liye tumhara bachpan udhar leti hun.
Moments woven into pearl-like droplets of water spilling the lake of my emotions to be read by my loved ones..
Tuesday, August 23, 2011
Monday, April 12, 2010
Love me..Love me not..
भूल जाती हूँ कि खफा तो अपनों से हुआ जाता है .. पराये लोगों से नहीं..
हाँ, तुम अब वो नहीं, तुम मेरे नहीं.
हाँ, तुम अब वो नहीं, तुम मेरे नहीं.
Wednesday, March 24, 2010
प्रश्न
प्यार मेरा तुम लेते नही, रिश्ता भी ठुकराते नही
तुम्हारा ही प्यार माँग माँग के इकठा किया है
कभी सूद समेत वापिस माँगा तो जाने क्या दूँगी
यूही झिड़क देते हो, ज़रा हट्के बैठते हो
पहचान ने के लिए ही चुपके से तुम्हे छूके देखा है
किसी दिन खुद तुमने बाहों में भर लिया तो जाने कैसे संभल पाउगी
ज़रा खून निकलने से दिल दहलता है, दिल भी कभी चोट खाता है
उसी दिल से रागों में खून दौड़ता है
अब पूछ बैठे कि मेरे दिल से खून क्यूँ निकला करे तो क्या कहूँगी
एहमियत नही, विश्वास है कि गिरी तो हाथ तुम दोगे नही
मन को समझा कर बैठी हू कि आदट नही
और ये क्या कि सबके सामने दूर से हाथ रखा है तुमने अभी?
तुम्हारा ही प्यार माँग माँग के इकठा किया है
कभी सूद समेत वापिस माँगा तो जाने क्या दूँगी
यूही झिड़क देते हो, ज़रा हट्के बैठते हो
पहचान ने के लिए ही चुपके से तुम्हे छूके देखा है
किसी दिन खुद तुमने बाहों में भर लिया तो जाने कैसे संभल पाउगी
ज़रा खून निकलने से दिल दहलता है, दिल भी कभी चोट खाता है
उसी दिल से रागों में खून दौड़ता है
अब पूछ बैठे कि मेरे दिल से खून क्यूँ निकला करे तो क्या कहूँगी
एहमियत नही, विश्वास है कि गिरी तो हाथ तुम दोगे नही
मन को समझा कर बैठी हू कि आदट नही
और ये क्या कि सबके सामने दूर से हाथ रखा है तुमने अभी?
Tuesday, September 8, 2009
Icy Glimpses
Stealing glances I do and you do too :)
I wonder what relation we are holding to
You hated me, I ignored you too
You are ignoring me still and I wonder why this is a distraction too
Yet you keep sitting next to me..
Unknowingly though..?
I wonder what relation we are holding to
You hated me, I ignored you too
You are ignoring me still and I wonder why this is a distraction too
Yet you keep sitting next to me..
Unknowingly though..?
Thursday, June 25, 2009
प्यार से..प्यार में
यूँ तड्पना छिपा है
क्यूँ सीने में
बातों की बेरुखी
क्यूँ मेरी ही मुहब्ब्त में?
उन्हीं के लिये दिल धडकना
क्यूं लिखा है किस्मत में
शायद जब छटपटाते हुए हाथ से उनकी चाह निकले
प्यार में हम जल-बुझे तो कुछ असर हो उन्हें भी..|
क्यूँ सीने में
बातों की बेरुखी
क्यूँ मेरी ही मुहब्ब्त में?
उन्हीं के लिये दिल धडकना
क्यूं लिखा है किस्मत में
शायद जब छटपटाते हुए हाथ से उनकी चाह निकले
प्यार में हम जल-बुझे तो कुछ असर हो उन्हें भी..|
Tuesday, April 28, 2009
कसक
मुझे साँस नहीं
तुम्हारी साँसों की ज़रुरत है
मेरा हाल ना पूछो
कभी मेरे लिये ही मुस्कुरा दो तो खुशी होगी
मेरे शब्दों से अर्थ तो निकालने लगे हो
उनके मायिने तो बदले नहीं..हाँ, तुम समझे नहीं तो सब निरर्थक होगा
वक्त बीतता जा रहा है
आयिने में अक्स तुम्हारा अब भी दिखता नहीं
हाथों में हाथ महसूस हों ना हों
एक रूह छू देने वाला खयाल कह दो, होगा काफी वही
खवाब देख देख ज़िन्दगी कटती नहीं
पर सपनों में भी आरज़ू पूरी होती है कभी?
जीने लगी हूँ खुद ही
तो ये क्या, प्यार में पिघलने लगे वो भी..?!
जो माँगो वो मिलता नहीं
और बिन माँगे भी मिलता है सभी
शायद सब्र का नाम ज़िन्दगी
और सब्र करके जो मिले मीठा फल वही
तुम्हारी चाहत दिल में कम होती नहीं
कभी प्यार करोगे हमसे भी तुम उतना ही
प्यार होता पाने का ही नाम नहीं
प्यार दिल में करते रहे, किया ज़ायर नहीं
पल पल साथ हो मेरे
फिर भी ये कसक है कि जाती ही नहीं..
तुम्हारी साँसों की ज़रुरत है
मेरा हाल ना पूछो
कभी मेरे लिये ही मुस्कुरा दो तो खुशी होगी
मेरे शब्दों से अर्थ तो निकालने लगे हो
उनके मायिने तो बदले नहीं..हाँ, तुम समझे नहीं तो सब निरर्थक होगा
वक्त बीतता जा रहा है
आयिने में अक्स तुम्हारा अब भी दिखता नहीं
हाथों में हाथ महसूस हों ना हों
एक रूह छू देने वाला खयाल कह दो, होगा काफी वही
खवाब देख देख ज़िन्दगी कटती नहीं
पर सपनों में भी आरज़ू पूरी होती है कभी?
जीने लगी हूँ खुद ही
तो ये क्या, प्यार में पिघलने लगे वो भी..?!
जो माँगो वो मिलता नहीं
और बिन माँगे भी मिलता है सभी
शायद सब्र का नाम ज़िन्दगी
और सब्र करके जो मिले मीठा फल वही
तुम्हारी चाहत दिल में कम होती नहीं
कभी प्यार करोगे हमसे भी तुम उतना ही
प्यार होता पाने का ही नाम नहीं
प्यार दिल में करते रहे, किया ज़ायर नहीं
पल पल साथ हो मेरे
फिर भी ये कसक है कि जाती ही नहीं..
Monday, March 16, 2009
तुम याद आये..पर क्या खूब याद आये!
वो हसीन पल याद कुछ ऐसे आये
किसी और के चहरे से तुम तक फिर हम आये
वो इन्सान जो हमें पहचान तो ना पाये
शुक्रिया उनका, जो धूप में तुम्हारी छाँव लाये
दो आँसू फिर आँखों में छलक आये
क्या हम भी तुम्हें याद आये?
हज़ार ख्याल कौंध गये
बरसात के दिन जैसे आये
खिडकी के शीशे वो बाँहें फैलाये
आँखों में तुम्हारा अक्स जैसे दिख जाये
भीड के बीच गहरी साँस लिये
होंठों पे तुम्हारा नाम लाये
पर ज़ुबान भी लड्खडाये
ज़िन्दगी के मोड पे तज्जुब सा हो जाये
जानकर खुश हुए?
कि आज भी तुम्हारी अवाज़ दिल को छू जाये..
आज एक अरसे बाद हम मुस्कुराये
प्यार के वो दीवाने एहसास लौट आये
:)..इतने सवाल ज़हन में उठ आये
क्यूँ ये सब तब याद ना आये
इश्वर का शुक्रिया जो किसी का कुछ गुम जाये
इसी बहाने से सही हम उन्हें याद आये
उस रोज़ तुम हमें याद आये..
क्या मालुम्..क्या खूब् याद आये!
किसी और के चहरे से तुम तक फिर हम आये
वो इन्सान जो हमें पहचान तो ना पाये
शुक्रिया उनका, जो धूप में तुम्हारी छाँव लाये
दो आँसू फिर आँखों में छलक आये
क्या हम भी तुम्हें याद आये?
हज़ार ख्याल कौंध गये
बरसात के दिन जैसे आये
खिडकी के शीशे वो बाँहें फैलाये
आँखों में तुम्हारा अक्स जैसे दिख जाये
भीड के बीच गहरी साँस लिये
होंठों पे तुम्हारा नाम लाये
पर ज़ुबान भी लड्खडाये
ज़िन्दगी के मोड पे तज्जुब सा हो जाये
जानकर खुश हुए?
कि आज भी तुम्हारी अवाज़ दिल को छू जाये..
आज एक अरसे बाद हम मुस्कुराये
प्यार के वो दीवाने एहसास लौट आये
:)..इतने सवाल ज़हन में उठ आये
क्यूँ ये सब तब याद ना आये
इश्वर का शुक्रिया जो किसी का कुछ गुम जाये
इसी बहाने से सही हम उन्हें याद आये
उस रोज़ तुम हमें याद आये..
क्या मालुम्..क्या खूब् याद आये!
Thursday, February 12, 2009
कभी सोचा है तुमने..
एक झिड्क तुम्हारी, क्या असर कर जाती है
नाज़ुक से दिल पे मेरे, एक एक घाव अभी भी बाकी है
और कहाँ एक नज़र तुम्हारी, प्यार से मेरी ओर पलटी है
बुझे से मेरे दिन को, रोशन रोशन किये है
एक ख्वाहिश भी तुम्हारी, जो कभी ज़ायर हुई है
तो सूरज से भी सुनहरा वर्णु उतार लाने की इच्छा हुई है
एक झलक पे तुम्हारी, लोगों ने जान देने कि बातें करी हैं?
हमें हर पल में सौ सौ बार मरके भी साथ जीने की ख्वाहिश् हुई है
भावुक तो हो, कुछ कह पाने में मुश्किल तुम्हें है
कम बोलती थी,प्यार में तुम्हारी ज़ुबान बनने की चाहत हुई है
एक दीवार से कई बार अन्धेरे में भिड जाती हूँ, बहुत चोट पायी है
चाँद को उस पार देखकर्, दीवाने दिल का रुक पाना भी मुश्किल है
एक नहीं हज़ार उपमायें मिली होगीं तुम्हें, नहीं?
किस चीज़ कि तारीफ पहले हो, इस उधेड्बुन से निकलने की कोशिशें हैं
एक बढाई भी चुन लूँ उन सभी में, तो कम मुश्किल नहीं है
तुम ही ने कहा, तुम्हें पसंद नहीं है..
एक मुस्कुराहट के लिये तुम्हारी, क्या क्या किया है
सर से पाँव तक बदल चुकी हूँ, क्या कोई मुझे अब भी पहचानता है?
एक पुरानी मीठी-शब्द्-लकीर पे तुम्हारी, गेहरा विशवास हुआ है
बाद के खुरदुरे रासतों को भी,'ज़िन्दगी के उतार्-चढाव्' करार दिया है
इच्छा है कि भीड से अलग बनो, तुम्हारे साथ चलने की दरकार है
एक दिन के लिये ही सही, आसमाँ मुझपे वो नूर बख्शे
प्यार तो है तुम्हें, पर उसे देख पगलों सा हो जाये!
नाज़ुक से दिल पे मेरे, एक एक घाव अभी भी बाकी है
और कहाँ एक नज़र तुम्हारी, प्यार से मेरी ओर पलटी है
बुझे से मेरे दिन को, रोशन रोशन किये है
एक ख्वाहिश भी तुम्हारी, जो कभी ज़ायर हुई है
तो सूरज से भी सुनहरा वर्णु उतार लाने की इच्छा हुई है
एक झलक पे तुम्हारी, लोगों ने जान देने कि बातें करी हैं?
हमें हर पल में सौ सौ बार मरके भी साथ जीने की ख्वाहिश् हुई है
भावुक तो हो, कुछ कह पाने में मुश्किल तुम्हें है
कम बोलती थी,प्यार में तुम्हारी ज़ुबान बनने की चाहत हुई है
एक दीवार से कई बार अन्धेरे में भिड जाती हूँ, बहुत चोट पायी है
चाँद को उस पार देखकर्, दीवाने दिल का रुक पाना भी मुश्किल है
एक नहीं हज़ार उपमायें मिली होगीं तुम्हें, नहीं?
किस चीज़ कि तारीफ पहले हो, इस उधेड्बुन से निकलने की कोशिशें हैं
एक बढाई भी चुन लूँ उन सभी में, तो कम मुश्किल नहीं है
तुम ही ने कहा, तुम्हें पसंद नहीं है..
एक मुस्कुराहट के लिये तुम्हारी, क्या क्या किया है
सर से पाँव तक बदल चुकी हूँ, क्या कोई मुझे अब भी पहचानता है?
एक पुरानी मीठी-शब्द्-लकीर पे तुम्हारी, गेहरा विशवास हुआ है
बाद के खुरदुरे रासतों को भी,'ज़िन्दगी के उतार्-चढाव्' करार दिया है
इच्छा है कि भीड से अलग बनो, तुम्हारे साथ चलने की दरकार है
एक दिन के लिये ही सही, आसमाँ मुझपे वो नूर बख्शे
प्यार तो है तुम्हें, पर उसे देख पगलों सा हो जाये!
Tuesday, February 3, 2009
खोयी सी हूँ
नज़र पड्ते ही तुम्हारी
सिमट सी जाती हूँ
आँखें झुकी जाती हैं
बन्द करके ईशवर से
कुछ और पल का साथ माँगती हूँ.
सिमट सी जाती हूँ
आँखें झुकी जाती हैं
बन्द करके ईशवर से
कुछ और पल का साथ माँगती हूँ.
Thursday, January 29, 2009
मूक विचार्
कल शाम का वाकया
कुछ नया नहीं लाया है..
एक गरीब आदमी आके
रेड लाइट पे गाडी के पास रुक जाता है
हाथों में ढेर से गुब्बारे लिये
१० रुपये में सारे खरीदने के लिये कहता है
रोज़ की तरह सब उसे झिडक देते हैं
हम भी गाडी थोडी आगे बढा लेते हैं
रेड लाइट अभी खुली नहीं
आज उसे किस्मत से एक गाडी मिली
धीरे से शीशा खुलता है
कोई सारे गुब्बारे ले लेता है
वो गुब्बारे पकडाता है
और बेहद खुशी से मुस्कुराता है
पैसे लेके
आगे चल पडता है
तभी एक छोटा बच्चा
नंगे पैर वोही गाडी बजाता है
और उसी इन्सान को देखता
दयनीय सी दृश्टि से वोही गुब्बारे माँगता है
मेरा दिल जाने क्या सोचता है
कुछ गहराईयों में डूब जाता है..
कुछ नया नहीं लाया है..
एक गरीब आदमी आके
रेड लाइट पे गाडी के पास रुक जाता है
हाथों में ढेर से गुब्बारे लिये
१० रुपये में सारे खरीदने के लिये कहता है
रोज़ की तरह सब उसे झिडक देते हैं
हम भी गाडी थोडी आगे बढा लेते हैं
रेड लाइट अभी खुली नहीं
आज उसे किस्मत से एक गाडी मिली
धीरे से शीशा खुलता है
कोई सारे गुब्बारे ले लेता है
वो गुब्बारे पकडाता है
और बेहद खुशी से मुस्कुराता है
पैसे लेके
आगे चल पडता है
तभी एक छोटा बच्चा
नंगे पैर वोही गाडी बजाता है
और उसी इन्सान को देखता
दयनीय सी दृश्टि से वोही गुब्बारे माँगता है
मेरा दिल जाने क्या सोचता है
कुछ गहराईयों में डूब जाता है..
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