Moments woven into pearl-like droplets of water spilling the lake of my emotions to be read by my loved ones..
Tuesday, December 23, 2008
ख्याल
एक पल जीवन में ऐसा था जब खामोशी थी और थोङा सा ही सही पर बोलने की ज़रुरत थी..आज वो समय है कि अपने खामोश व्यक्तित्व को खोजना ज़रुरी हो गया है.
Monday, December 22, 2008
वो बात नहीं अब जीने में..
ना लिखें कवि इन खूबसूरत लफ्ज़ों को
ना पिरोयें इन्हें शेरो शायिरी में
ना गाया करो ऐ गीतकारों
ना मधुर कुछ गुनगुनाओ इन लम्हों में
ना बादलों तुम गरज बरस जाओ
ना हो एहसास मोहब्बत का सावन में
ना बागों को रोशन किया करो
ना मुस्कुराओ सुर्यमुखी बेरुखी में
ना छेङो मेरी लटें हवाओं
ना ठिठोली करो भीगी पलकों से
ना रंग छूओ मेरे हाथों को
ना उम्मीद करो, भरूँ तुम्हें कागज़ में
ना थाप सुनाओ ढोली सुनो
ना थिरकने को कहो बेबसी में
ना बातें करो चाँद की सखियों
ना ओढूँ चाँदनी लाज में
मीत मुँह मोडे हैं मुझसे
वो बात नहीं अब जीने में..
ना पिरोयें इन्हें शेरो शायिरी में
ना गाया करो ऐ गीतकारों
ना मधुर कुछ गुनगुनाओ इन लम्हों में
ना बादलों तुम गरज बरस जाओ
ना हो एहसास मोहब्बत का सावन में
ना बागों को रोशन किया करो
ना मुस्कुराओ सुर्यमुखी बेरुखी में
ना छेङो मेरी लटें हवाओं
ना ठिठोली करो भीगी पलकों से
ना रंग छूओ मेरे हाथों को
ना उम्मीद करो, भरूँ तुम्हें कागज़ में
ना थाप सुनाओ ढोली सुनो
ना थिरकने को कहो बेबसी में
ना बातें करो चाँद की सखियों
ना ओढूँ चाँदनी लाज में
मीत मुँह मोडे हैं मुझसे
वो बात नहीं अब जीने में..
Tuesday, December 16, 2008
तुम जाना ना चाहो दूर हमसे
तुम जाना ना चाहो दूर हमसे
तुम्हें दूर ले जायें हमसे नये रिशते
बेबस मन तुम्हारा मेरी ओर खिंचे
और दोश हमारी नज़र को दिये
मजबूर तुम पलट के चले
हाल भी ना जाना रुक के हमसे
तरसते रहे हम एक शब्द को तुम्हारे
महीने और साल बीतते चले गये
वादे झूठ से सच और फिर से झूठे
आदतें बिगाङने को मना करते
फिर नराज़गी भरे प्यार पे तुम्हारे मरते
रातों को - एक ही चाँद को - दो दिल दो देशों से देखते
और रिश्ता नाज़ुक डोर से जोङे रखते
नज़रों से चहरे ओंझल हुए
खयालों पे भी प्रशन चिन्ह लगे
चाँद है डूबा, पहचान भी भूले
याद रखेंगे हम तुम्हें, कसम से
शिक्वा ना कभी कहेंगे किसी से
काश्, कभी सामना हो तुमसे
पर बोलते रुक जायेंगे घबराके
टोक दे तुम्हें कोइ, नराज़ हो तुमपे
ये चाहेंगे नहीं कि हो हमारी वज़ह से
झुटला देंगे रुकी धङकनें
नीचे नज़र करेंगे, मायुस होके
ना तुम जाना चाहो दूर हमसे
तुम्हें दूर नये रिश्ते ले गये हमसे.
तुम्हें दूर ले जायें हमसे नये रिशते
बेबस मन तुम्हारा मेरी ओर खिंचे
और दोश हमारी नज़र को दिये
मजबूर तुम पलट के चले
हाल भी ना जाना रुक के हमसे
तरसते रहे हम एक शब्द को तुम्हारे
महीने और साल बीतते चले गये
वादे झूठ से सच और फिर से झूठे
आदतें बिगाङने को मना करते
फिर नराज़गी भरे प्यार पे तुम्हारे मरते
रातों को - एक ही चाँद को - दो दिल दो देशों से देखते
और रिश्ता नाज़ुक डोर से जोङे रखते
नज़रों से चहरे ओंझल हुए
खयालों पे भी प्रशन चिन्ह लगे
चाँद है डूबा, पहचान भी भूले
याद रखेंगे हम तुम्हें, कसम से
शिक्वा ना कभी कहेंगे किसी से
काश्, कभी सामना हो तुमसे
पर बोलते रुक जायेंगे घबराके
टोक दे तुम्हें कोइ, नराज़ हो तुमपे
ये चाहेंगे नहीं कि हो हमारी वज़ह से
झुटला देंगे रुकी धङकनें
नीचे नज़र करेंगे, मायुस होके
ना तुम जाना चाहो दूर हमसे
तुम्हें दूर नये रिश्ते ले गये हमसे.
Monday, December 15, 2008
प्यार है तुमसे..
क्या कभी ऐसा होगा कि तुम आओगे?
देते हो मन पे रोज़ दस्तक
क्या कभी पलकों को छू लोगे
गिरते मोती कहेंगे..
हाँ, प्यार है तुमसे
मुख अब शान्त है, लव्ज़ हैं सोये
पर अब भी जो हवा नाम तुम्हारा ले आये
तो गालों पे सिरहन वो ही होने लगे
और झुकी नज़रें कहें..
हाँ, प्यार है तुम्हीं से
रंगों से मन लगाते हुए
ज़ो बैठूँ रंगोली बनाने
उङते रज कण माथे काला टीका लगायें
आयिना भी कह दे..
हाँ, प्यार मेरा याद है तुम्हें
फूल पसंद हैं हमेशा से
खेलती हूँ बागों में उन्हीं से
पन्खुणीयाँ उडके ठहर जायें बालों पे
हवा भी थम जाये..कहे
हाँ, प्यार ना छूटे तुमसे
सावन की बरसात होने लगे
मौसम फिर खशनुमा होने लगे
नाच उठे मेरा मन ऐसे
आसमान से कहने लगे
हाँ..कभी तो मिलोगे - प्यार है तुम्हीं से
अकेले चलती हूँ पर बिन चाह के
बचती हूँ भीड के रूखे स्पर्श से
और इसी भीड में वो स्पर्श हो हौले से
रोम रोम फिर कहने लगे
हाँ, मन में वोहि - प्यार है उन्हीं से.
देते हो मन पे रोज़ दस्तक
क्या कभी पलकों को छू लोगे
गिरते मोती कहेंगे..
हाँ, प्यार है तुमसे
मुख अब शान्त है, लव्ज़ हैं सोये
पर अब भी जो हवा नाम तुम्हारा ले आये
तो गालों पे सिरहन वो ही होने लगे
और झुकी नज़रें कहें..
हाँ, प्यार है तुम्हीं से
रंगों से मन लगाते हुए
ज़ो बैठूँ रंगोली बनाने
उङते रज कण माथे काला टीका लगायें
आयिना भी कह दे..
हाँ, प्यार मेरा याद है तुम्हें
फूल पसंद हैं हमेशा से
खेलती हूँ बागों में उन्हीं से
पन्खुणीयाँ उडके ठहर जायें बालों पे
हवा भी थम जाये..कहे
हाँ, प्यार ना छूटे तुमसे
सावन की बरसात होने लगे
मौसम फिर खशनुमा होने लगे
नाच उठे मेरा मन ऐसे
आसमान से कहने लगे
हाँ..कभी तो मिलोगे - प्यार है तुम्हीं से
अकेले चलती हूँ पर बिन चाह के
बचती हूँ भीड के रूखे स्पर्श से
और इसी भीड में वो स्पर्श हो हौले से
रोम रोम फिर कहने लगे
हाँ, मन में वोहि - प्यार है उन्हीं से.
Monday, December 1, 2008
एहसास प्यार का

अजीब होता है प्यार का जज़्बा, कुछ माँगता नही ना मिले तो
बस दिये जाना चाहता है, अगर कोई लेना ना चाहे तो भी
तुम्हें भूल कर भी भुलाने को जी नही करता
तुम भूल गये हो फिर भी तुम्हारा हाल पूछना लगता है ज़रुरी
तुम्हें भूल कर भी तुम्हारी हँसी आँखों से नहीं जाती
ना अब तुम पलट के मेरी तरफ मुसकुराओगे कभी लेकिन फिर भी
महसूस करती हूँ तुम्हारी पलकें, अपनी पलकें बन्द करके भी
मन में खयाल आते हैं तुम्हारे, सही न लगे फिर भी
बहाने से बोलती हूँ तुम्हारे बारे में, जो बैठती हूँ अजनबी के साथ भी
तुम हो नहीं पास, वो लम्बे दौर बातों के चल न सकेगें कभी
पर सभी बातें याद हैं, छोटी से छोटी भी
ये लिख रही हूँ की भुलाया नहीं जाता पर क्या भूल सकी हूँ आज भी
ये दिन, यही दुख और यह वक़्त जब बने थे ज़िन्दगी उसकी
तब क्या हाथ बढाके सम्भाल सकी थी?
पर फिर भी, बहुत मुश्किल से थामें रखी है डोरी इस प्यार की.
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