Moments woven into pearl-like droplets of water spilling the lake of my emotions to be read by my loved ones..
Tuesday, December 23, 2008
ख्याल
एक पल जीवन में ऐसा था जब खामोशी थी और थोङा सा ही सही पर बोलने की ज़रुरत थी..आज वो समय है कि अपने खामोश व्यक्तित्व को खोजना ज़रुरी हो गया है.
2 comments:
Anonymous
said...
होता है कभी शायद ऐसा लेकिन देखिये जरा कोई आस लगाये बैठा रहता है की अब आपके मुह से उसका नाम निकलेगा और नही निकलता तो थोड़े दुःख और उम्मीद के साथ की अगली बार मेरा ही नाम आएगा से आपकी तरफ देखता रहता है.. मै हमेशा यही मानता हू की आप अधिक नही बोलती.. लेकिन ऐसे ही यह विचार थोड़े न आपके मन में आ गया.. लेकिन शायद आपने वर्तमान की भूतकाल से तुलना की.. तभी यह फर्क आया.. चलिए जो भी कीजिये मुस्कुराना न बंद कीजियेगा.. वो सबसे जरुरी है :-)
2 comments:
होता है कभी शायद ऐसा लेकिन देखिये जरा कोई आस लगाये बैठा रहता है की अब आपके मुह से उसका नाम निकलेगा और नही निकलता तो थोड़े दुःख और उम्मीद के साथ की अगली बार मेरा ही नाम आएगा से आपकी तरफ देखता रहता है.. मै हमेशा यही मानता हू की आप अधिक नही बोलती.. लेकिन ऐसे ही यह विचार थोड़े न आपके मन में आ गया.. लेकिन शायद आपने वर्तमान की भूतकाल से तुलना की.. तभी यह फर्क आया.. चलिए जो भी कीजिये मुस्कुराना न बंद कीजियेगा.. वो सबसे जरुरी है :-)
..:)
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