भूल जाती हूँ कि खफा तो अपनों से हुआ जाता है .. पराये लोगों से नहीं..
हाँ, तुम अब वो नहीं, तुम मेरे नहीं.
Moments woven into pearl-like droplets of water spilling the lake of my emotions to be read by my loved ones..
Monday, April 12, 2010
Wednesday, March 24, 2010
प्रश्न
प्यार मेरा तुम लेते नही, रिश्ता भी ठुकराते नही
तुम्हारा ही प्यार माँग माँग के इकठा किया है
कभी सूद समेत वापिस माँगा तो जाने क्या दूँगी
यूही झिड़क देते हो, ज़रा हट्के बैठते हो
पहचान ने के लिए ही चुपके से तुम्हे छूके देखा है
किसी दिन खुद तुमने बाहों में भर लिया तो जाने कैसे संभल पाउगी
ज़रा खून निकलने से दिल दहलता है, दिल भी कभी चोट खाता है
उसी दिल से रागों में खून दौड़ता है
अब पूछ बैठे कि मेरे दिल से खून क्यूँ निकला करे तो क्या कहूँगी
एहमियत नही, विश्वास है कि गिरी तो हाथ तुम दोगे नही
मन को समझा कर बैठी हू कि आदट नही
और ये क्या कि सबके सामने दूर से हाथ रखा है तुमने अभी?
तुम्हारा ही प्यार माँग माँग के इकठा किया है
कभी सूद समेत वापिस माँगा तो जाने क्या दूँगी
यूही झिड़क देते हो, ज़रा हट्के बैठते हो
पहचान ने के लिए ही चुपके से तुम्हे छूके देखा है
किसी दिन खुद तुमने बाहों में भर लिया तो जाने कैसे संभल पाउगी
ज़रा खून निकलने से दिल दहलता है, दिल भी कभी चोट खाता है
उसी दिल से रागों में खून दौड़ता है
अब पूछ बैठे कि मेरे दिल से खून क्यूँ निकला करे तो क्या कहूँगी
एहमियत नही, विश्वास है कि गिरी तो हाथ तुम दोगे नही
मन को समझा कर बैठी हू कि आदट नही
और ये क्या कि सबके सामने दूर से हाथ रखा है तुमने अभी?
Subscribe to:
Comments (Atom)